• સમય:
  • તારીખ:
  • વિક્રમ સવત : 2073
  • ચોઘડિયુ:
  • હોરા:

पावन पर्व नवरात्रो में दुर्गा माँ के नव रूपों की पूजा नौ दिनों तक चलती हैं| नवरात्र के आरंभ में प्रतिपदा तिथि को उत्तम मुहर्त में कलश या घट की स्थापना की जाती है। कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता है जो की किसी भी पूजा में सबसे पहले पूजनीय है इसलिए सर्वप्रथम घट रूप में गणेश जी को बैठाया जाता है |

कलश स्थापना और पूजन के लिए महत्त्वपूर्ण वस्तुएं

    • मिट्टी का पात्र और जौ के ११ या २१ दाने
    • शुद्ध साफ की हुई मिट्टी जिसमे पत्थर नहीं हो
    • शुद्ध जल से भरा हुआ मिट्टी , सोना, चांदी, तांबा या पीतल का कलश
    • मोली (लाल सूत्र)
    • अशोक या आम के 5 पत्ते
    • कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन
    • साबुत चावल
    • एक पानी वाला नारियल
    • पूजा में काम आने वाली सुपारी
    • कलश में रखने के लिए सिक्के
    • लाल कपड़ा या चुनरी
    • मिठाई
    • लाल गुलाब के फूलो की माला

नवरात्र कलश स्थापना की विधि

महर्षि वेद व्यास से द्वारा भविष्य पुराण में बताया गया है की कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छे से शुद्ध किया जाना चाहिए। उसके उपरान्त एक लकड़ी का पाटे पर लाल कपडा बिछाकर उसपर थोड़े चावल गणेश भगवान को याद करते हुए रख देने चाहिए | फिर जिस कलश को स्थापित करना है उसमे मिट्टी भर के और पानी डाल कर उसमे जौ बो देना चाहिए | इसी कलश पर रोली से स्वास्तिक और ॐ बनाकर कलश के मुख पर मोली से रक्षा सूत्र बांध दे | कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रख दे और फिर कलश के मुख को ढक्कन से ढक दे। ढक्कन को चावल से भर दे। पास में ही एक नारियल जिसे लाल मैया की चुनरी से लपेटकर रक्षा सूत्र से बांध देना चाहिए। इस नारियल को कलश के ढक्कन रखे और सभी देवी देवताओं का आवाहन करे । अंत में दीपक जलाकर कलश की पूजा करे । अंत में कलश पर फूल और मिठाइयां चढ़ा दे | अब हर दिन नवरात्रों में इस कलश की पूजा करे | विशेष ध्यान देने योग्य बात : जो कलश आप स्थापित कर रहे है वह मिट्टी, तांबा, पीतल , सोना ,या चांदी का होना चाहिए। भूल से भी लोहे या स्टील के कलश का प्रयोग न

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